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एक बार फिर आयुष विश्वविद्यालय ने अपनी फजीहत करवा ली / आयुष विश्विद्यालय के परीक्षा नियंत्रक इस्तीफा दो

आज फिर एक बार आयुष विश्वविद्यालय ने अपनी फजीहत करवा ली । जब विश्विद्यालय प्रशासन से 10 दिन पहले ही छात्रसंघ ने परीक्षा की तिथि बढ़ने की मांग की थी तो बड़े गुरुर के साथ विश्विद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ की मांग को मानने से मन कर दिया था लेकिन आज वो खुद ही परीक्षा करवाने में असमर्थ साबित हो गए । शिक्षा का ऐसा मजाक बनाने वाले विश्विद्यालय के परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव डॉ के एल तिवारी को इस्तीफा दे देना चाहिए । # drramansingh   # ayushunivercity   # ausucg   # studentunion Sauravkumarprabhat   FACEBOOK -  AYUSH University Student Union AUSUCG   Twitter -  @ausucg_official   Instagram -  ausucg_official

आयुष विश्विद्यालय प्रसाशन ने छात्रों को परेशान और हताश करने का ले रखा है ठेका

ऐसा लगता है जैसे आयुष विश्वविद्यालय ( पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य एवं आयुष विश्विद्यालय ) प्रसाशन ने छात्रों को परेशान और हताश करने का ठेका ले रखा है । अभी हो रहे नर्सिंग की परीक्षाएँ इसी की एक कड़ी हैं । ऐसे विश्वविद्यालय के कुलपति को प्रणाम है जो परीक्षा परिणाम के आने के 2 दिनों के अंदर परीक्षा करवाने को आतुर हैं । ये तो बस नमूना है यहां विश्वविद्यालय की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है । अगर विश्वविद्यालय चला नही सकते तो कुर्सी छोड़ दो । विश्वविद्यालय के हुक्मरान अपने काम करने का तरीका सुधारे नही तो छात्रसंघ कुलपति और कुलसचिव को हटाने के लिए आंदोलन करने को बाध्य होगा ।  # drramansingh   # ayushunivercity   # ausucg   # studentunion Sauravkumarprabhat   FACEBOOK -  AYUSH University Student Union AUSUCG   Twitter - @ausucg_official   Instagram -  ausucg_official

प्रदेश का एकमात्र स्वास्थ्य विश्विद्यालय खुद संविदा के स्टाफ से चल रहा है

 01/06/2017 के दैनिक भाष्कर में छपी ये रिपोर्ट है जिसमे कहा गया है कि कॉपी चेक करने के लिए योग्य शिक्षक की कमी है जबकि वास्तविकता में बात कुछ और है । कमी अनुभवी शिक्षकों की नही बल्कि विश्वास और भरोसे की है । विश्वविद्यालय के उच्च पदाधिकारियों को लगता है कि सिर्फ वही लोग छत्तीसगढ़ में योग्य हैं और थोड़ी बहुत योग्यता उनमे है जो इनके आगे पीछे चक्कर लगाते रहते हैं । सच्चाई ये है कि विश्वविद्यालय प्रसाशन प्राइवेट कॉलेज के किसी भी शिक्षकों से कॉपी चेक करवाना नही चाहता जबकि प्रदेश के कई निजी म हाविद्यालयों में सरकारी महाविद्यालयों से अधिक योग्य शिक्षक हैं । अगर विश्वविद्यालय प्रसाशन अपने अहम को अलग रख कर छात्रों के हित मे सोचे तो इस समस्या को हल होने में हफ्ते भर का समय भी नही लगेगा । इसी खबर के एक हिस्से में हमारे विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ के एल तिवारी सर का बयान है कि रिजल्ट निकलने में कभी कभी देरी हो जाती है जबकि सच्चाई ये है कि विश्वविद्यालय के आज तक के इतिहास में एक दो बार ही सही समय पे रिजल्ट आया है । उनको शर्म आनी चाहिए ऐसी बयानबाजी करते हुए । यहाँ छात्रों के भविष्य के साथ खिलव...