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Showing posts from 2017

विश्वविद्यालय को डर था कि अगर उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति छात्रों की दे दी गयी तो इनकी पोल खुल जाएगी - आज कानून का डंडा भी इनके उपर चल गया

भगवान के घर देर है अंधेर नहीं । आयुष विश्विद्यालय छात्रसंघ और अ.भा.वि.प. पिछले करीब दो सालों से लगातार विश्विद्यालय से ये मांग कर रहा है कि सभी छात्रों को उनके अनुरोध पे RTI के तहत उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति प्रदान करे , इसके लिए कई आंदोलन भी किये गए लेकिन लगातार विश्विद्यालय इस से इंकार करते रहा क्योकि विश्वविद्यालय को डर था कि अगर उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति छात्रों की दे दी गयी तो इनकी पोल खुल जाएगी । आज कानून का डंडा भी इनके उपर चल गया । माननीय न्यायालय का एम डी एस के छात्रों के सन्दर्भ में उत्तर पुस्तिकाओं की छायाप्रति प्रदान करने का निर्देश देना आज आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति एवं पूरे विश्वविद्यालय के उपर करारा तमाचा है । छात्रसंघ एवं अ.भा.वि.प. माननीय न्यायालय के इस ऐतिहासिक फैसले है स्वागत करती है ।अभी भी वक्त है कुलपति जी संभल जाइए और अपनी तानाशाही नीतियों से छात्रों का शोषण करना बंद कीजिये । विश्विद्यालय छात्रसंघ और अ.भा.वि.प. आपसे मांग करती है कि छात्रहित को ध्यान में रखते हुए सभी संकायों के छात्रों को उनके अनुरोध पे उत्तर पुस्तिकाओं की अभिप्रमाणित छायाप्रति उपल…

स्मार्ट कार्ड में फर्जीवाड़ा करने वाले कुछ चिकित्सको की सजा आम जनता को

सरकार का ये फैसला बेतुका और जल्दबाजी में लिया गया लग रहा है । ऐसा प्रतीत हो रहा है जैसे भ्रष्ट अधिकारियों एवं एवं स्मार्ट कार्ड में फर्जीवाड़ा करने वाले कुछ चिकित्सको की सजा आम जनता को मिल रही है । अभी रायपुर के एक दंत चिकित्सक द्वारा फ़र्ज़ी इलाज का मामला सामने आया था जिसकी वजह से इस लूट खसोट की पोल खुली थी लेकिन ये भी सोचने वाली बात है कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के इतने दिनों तक फर्ज़ीवाड़ा नही किया जा सकता है । सरकार को इस पूरे प्रकरण में अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करनी चाहिए ।
इस फैसले से आम जन मानस पे क्या प्रभाव पड़ेगा इसके बारे में सोचना चाहिए था । अगर इस प्रकार का फैसला लागू ही करना है तो सर्वप्रथम सरकार को हर PHC में दंत चिकित्सक की बहाली करनी चाहिए और सभी अस्पतालों को दंत चिकित्सा से जुड़े अत्याधुनिक उपकरण से युक्त करना चाहिए । इतने बड़े राज्य में सिर्फ एक शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय है उसमे भी पीजी की पढ़ाई की सुविधा नही है और डॉ अम्बेडकर अस्पताल में गिनती के दंत चिकित्सक हैं , अब आप ही बताइए कि गरीब जनता के लिए ये कितनी परेशानी की बात है कि इतनी दूर जा के अपना इलाज करवा…

समय आ गया है कि सभी संकाय के छात्र एक साथ एक दूसरे के लिये आगे आएं

चाहे कोई भी संकाय हो विश्विद्यालय छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने पे तुला है इसलिए अब समय आ गया है कि सभी संकाय के छात्र एक साथ एक दूसरे के लिये आगे आएं ।
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एक बार फिर आयुष विश्वविद्यालय ने अपनी फजीहत करवा ली / आयुष विश्विद्यालय के परीक्षा नियंत्रक इस्तीफा दो

आज फिर एक बार आयुष विश्वविद्यालय ने अपनी फजीहत करवा ली । जब विश्विद्यालय प्रशासन से 10 दिन पहले ही छात्रसंघ ने परीक्षा की तिथि बढ़ने की मांग की थी तो बड़े गुरुर के साथ विश्विद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ की मांग को मानने से मन कर दिया था लेकिन आज वो खुद ही परीक्षा करवाने में असमर्थ साबित हो गए । शिक्षा का ऐसा मजाक बनाने वाले विश्विद्यालय के परीक्षा नियंत्रक सह कुलसचिव डॉ के एल तिवारी को इस्तीफा दे देना चाहिए ।

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आयुष विश्विद्यालय प्रसाशन ने छात्रों को परेशान और हताश करने का ले रखा है ठेका

ऐसा लगता है जैसे आयुष विश्वविद्यालय ( पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य एवं आयुष विश्विद्यालय ) प्रसाशन ने छात्रों को परेशान और हताश करने का ठेका ले रखा है । अभी हो रहे नर्सिंग की परीक्षाएँ इसी की एक कड़ी हैं । ऐसे विश्वविद्यालय के कुलपति को प्रणाम है जो परीक्षा परिणाम के आने के 2 दिनों के अंदर परीक्षा करवाने को आतुर हैं । ये तो बस नमूना है यहां विश्वविद्यालय की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है । अगर विश्वविद्यालय चला नही सकते तो कुर्सी छोड़ दो । विश्वविद्यालय के हुक्मरान अपने काम करने का तरीका सुधारे नही तो छात्रसंघ कुलपति और कुलसचिव को हटाने के लिए आंदोलन करने को बाध्य होगा । 
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प्रदेश का एकमात्र स्वास्थ्य विश्विद्यालय खुद संविदा के स्टाफ से चल रहा है

01/06/2017 के दैनिक भाष्कर में छपी ये रिपोर्ट है जिसमे कहा गया है कि कॉपी चेक करने के लिए योग्य शिक्षक की कमी है जबकि वास्तविकता में बात कुछ और है । कमी अनुभवी शिक्षकों की नही बल्कि विश्वास और भरोसे की है । विश्वविद्यालय के उच्च पदाधिकारियों को लगता है कि सिर्फ वही लोग छत्तीसगढ़ में योग्य हैं और थोड़ी बहुत योग्यता उनमे है जो इनके आगे पीछे चक्कर लगाते रहते हैं । सच्चाई ये है कि विश्वविद्यालय प्रसाशन प्राइवेट कॉलेज के किसी भी शिक्षकों से कॉपी चेक करवाना नही चाहता जबकि प्रदेश के कई निजी महाविद्यालयों में सरकारी महाविद्यालयों से अधिक योग्य शिक्षक हैं । अगर विश्वविद्यालय प्रसाशन अपने अहम को अलग रख कर छात्रों के हित मे सोचे तो इस समस्या को हल होने में हफ्ते भर का समय भी नही लगेगा ।
इसी खबर के एक हिस्से में हमारे विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ के एल तिवारी सर का बयान है कि रिजल्ट निकलने में कभी कभी देरी हो जाती है जबकि सच्चाई ये है कि विश्वविद्यालय के आज तक के इतिहास में एक दो बार ही सही समय पे रिजल्ट आया है । उनको शर्म आनी चाहिए ऐसी बयानबाजी करते हुए । यहाँ छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो …